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बसन्त पंचमी को पृथ्वीराज चौहान ने मार गिराया था मोहम्मद गोरी को

बसन्त पंचमी को पृथ्वीराज चौहान ने मार गिराया था मोहम्मद गोरी को
फर्रुखाबाद, 29 जनवरी । उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में गंगा तट पांचाल घाट पर लगे मेला रामनगरिया में संत महात्माओं ने बुधवार को कल्पवासियों को बसंत पंचमी के महत्व को बताया।
इस मौके पर स्वामी आनंद पुनीत ने कहा कि बसंत पंचमी का पर्व जहां हमारे धर्म से जुड़ा हुआ है। वही इस पर्व पर दिल्ली के राजा पृथ्वीराज और उनके कवि चंद्रवरदाई के शौर्य और पराक्रम से जुड़ा हुआ है। बसंत पंचमी के दिन ही दिल्ली के सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने अपने राजकवि की सहायता से काबुल में मोहम्मद गोरी को मार गिराया था। और खुद एक दूसरे को तलवार मार कर वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इतिहास इस महाबलिदानी के बलिदान को कभी नहीं भुला सकता।
स्वामी आनंद पुनीत ने संत महात्माओं को संबोधित करते हुए कहा कि पौराणिक गाथाओं के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व मां सरस्वती के जन्म के रूप में बनाया मनाया जाता है। इस दिन मां वाणी की पूजा अर्चना करते हैं। इतिहास के नजरिये से देखा जाए तो बसंत पंचमी का पर्व हमारे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इतिहास बताता है कि दिल्ली के सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने काबुल नरेश मोहम्मद गोरी को 16 बार पराजित किया था। उन्होंने उसे हर बार माफ कर दिया। वर्ष 1192 में जब मोहम्मद गोरी ने दिल्ली पर आक्रमण किया तो हमारे देश की राजधानी रहे कन्नौज के राजा जयचंद ने मोहम्मदगोरी को बताया कि यदि वह गायों को साथ लेकर युद्ध मैदान में उतरता है, तो पृथ्वीराज चौहान गायों पर आक्रमण नहीं करेगा। इन हालातों में उसे आसानी से जीता जा सकता है। घर का भेदी लंका ढाए वाली बात चरितार्थ करते हुए मोहम्मद गोरी ने 17वें वार दिल्ली के सम्राट पृथ्वीराज चौहान पर गायों को आगे रखकर आक्रमण किया। नतीजतन पृथ्वीराज चौहान मोहम्मद गोरी से पराजित हो गए। मोहम्मद गोरी उन्हें कैद करके अपने देश काबुल गया। वहां उन्हें तरह-तरह की यातनाएं देकर जेल में डाल दिया। हालात ये थे कि मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की दोनों आंखें निकाल ली। पृथ्वीराज चौहान के राज कवि चंदबरदाई बसंत पंचमी के दिन अपने राजा पृथ्वीराज चौहान से मिलने गए। जहां पर उन्होंने मोहम्मद गौरी को उसके घर में ही मार गिराने की योजना बनाई। कवि चंदबरदाई ने मोहम्मद गौरी को बताया कि उनके सम्राट शब्दभेदी है। वह आंख में पट्टी बांधकर भी जिस जगह आवाज होगी उस जगह को वेंध सकते हैं। यदि पृथ्वीराज चौहान का यह प्रदर्शन देख लिया जाए तो एक नजीर होगी।
मोहम्मद गोरी चन्दबरदाई की बात से सहमत हो गया। मोहम्मद गोरी ने अपने देश के रणबांकुरों को बुलाकर पृथ्वीराज चौहान को उस स्थान पर बुला लिया, जहां उन्हें शब्द भेद का धनुष बाण के द्वारा प्रदर्शन करना था। गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की आंखें फोड़ दी थीं। इसलिए उन्हें कार्यक्रम स्थल पर खुला छोड़ दिया और उन्हें धनुष बाण पकड़ा दिया।
इस दौरान राजकवि चंदबरदाई ने मोहम्मद गोरी से कहा कि मौजूदा समय में पृथ्वीराज चौहान आपके बंदी हैं। जब आप कार्यक्रम शुरू करने की आज्ञा देंगे तभी वह अपनी वाण विद्या का प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान पृथ्वीराज चौहान के राज कवि चंद्रवरदाई ने कई वीर रस की कविताएं सुनाई। उसने पृथ्वीराज चौहान को इशारे में बता दिया चार बांस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण, ता ऊपर सुल्तान है मत चूको चौहान। जैसे ही गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को धनुष विद्या का प्रदर्शन करने का आदेश दिया, उसी दौरान पृथ्वीराज चौहान ने 4 बांस 24 गज और 8 अंगुल के ऊपर निशाना लगाकर मोहम्मद गोरी को उसके घर में ही मार गिराया। मोहम्मद गौरी को मार गिराने के बाद पृथ्वीराज चौहान ने और उनके कवि चंदबरदाई ने एक दूसरे को तलवार मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस वजह से बसंत पंचमी का दिन दिल्ली के राजा की शहादत से जुड़ा हुआ है। यह दिन कन्नौज के राजा जयचंद की गद्दारी से जुड़ा हुआ है।
दूसरे अर्थों में बसंत पंचमी के समय तापमान बढ़ जाता है और आमजन मानस को सर्दी से निजात मिलने लगती है। गेहूं तथा अन्य अनाज में बाल आ जाती है, जिस वजह से ठंड का अंत होता है। इसलिए इसे बसंत कहा जाता है। बसंत ऋतु को मधुमास भी कहते हैं। इस ऋतु में सबसे ज्यादा फूल होते हैं। इस वजह से मधुमक्खियां सबसे ज्यादा शहद इकट्ठा करती हैं। इसलिए इसे मधुमास भी कहा गया है।
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